नमस्कार दोस्तों, एक बार फिर से स्वागत है आप सभी का संगणक ज्ञान आर्टिकल में। आज हम जानने वाले हैं ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में। जी हाँ आप सभी ने सुना होगा ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में।
तो इस आर्टिकल में हम कॉम्प्यूटर की ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में बात करने वाले हैं अगर आप भी ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे सबकुछ जानना चाहते हो तो इस आर्टिकल को पूरा अंत तक पढ़िये।
मैं आपको इस के बारे परिपूर्ण जानकारी देने की कोशिश करूंगा। तो चलिए देर किस बात की जानते ऑपरेटिंग सिस्टम का मतलब क्या हैं।
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| ऑपेरेटिंग सिस्टम क्या है |
- Table of Contents
- ऑपरेटिंग सिस्टम क्या हैं
- ऑपरेटिंग सिस्टम की आवश्यकता और कार्य
- ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्य:
- ऑपेरेटिंग सिस्टम की विशेषताएं
- ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार
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ऑपरेटिंग सिस्टम क्या हैं
आप सभी जानते हो कि सभी प्राणी मात्रा में दिल होता हैं, जब तक सभी के दिल की धड़कनें चलती है तब तक सभी की सांसे चलती हैं अगर दिल की धड़कने रूक गयीं तो साँसे भी चलना बंद होती हैं। और प्राण निकल जाते हैं।
वैसे ही कॉम्प्यूटर की भी बात होती हैं कॉम्प्यूटर का दिल होता हैं ऑपरेटिंग सिस्टम। इसे OS भी कहा जाता हैं ऑपरेटिंग सिस्टम के बिना कॉम्प्यूटर एक खाली डिब्बा जैसा ही है।
यानी की बिना ऑपरेटिंग सिस्टम के सिवा कॉम्प्यूटर कुछ भी काम नहीं कर सकता हैं। इसलिए कॉम्प्यूटर के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम बहुत ज़रूरी होतीं हैं।
आप दुकान से या कहीं से भी कॉम्प्यूटर ख़रीद लेते हो तो सबसे पहले उस कॉम्प्यूटर में ऑपरेटिंग सिस्टम इंस्टॉल करना होता हैं।
आपने सुना होगा WINDOWS 7 , WINDOWS 8 , WINDOWS XP, UNIX, Max Os ये सारे ऑपरेटिंग सिस्टम है। ये ऑपरेटिंग सिस्टम कॉम्प्यूटर में इंस्टॉल करने के बाद आप कॉम्प्यूटर में कोई भी एप्लिकेशन या प्रोग्राम चला सकते हो उसका यूज़ कर सकते हो।
ऑपरेटिंग सिस्टम कॉम्प्यूटर के हार्डवेयर यानी कि कीबोर्ड, माउस, मॉनिटर, स्पीकर्स, ओर जो भी हार्डवेयर आप यूज़ कर रहे हो उन सभी को चलाने में यूजर की मदद करता हैं।
साधारण भाषा में इसकी परिभाषा कर सकते हैं, "यूज़र को इंटरफ़ेस, हार्डवेयर का प्रबंधन और एप्लिकेशन रन करनेवाली सिस्टम को हम ऑपरेटिंग सिस्टम कह सकते हैं।"
ऑपरेटिंग सिस्टम की आवश्यकता और कार्य
कॉम्प्यूटर की बात की जाए तो ऑपरेटिंग सिस्टम एक महत्वपूर्ण हैं। मुख्य रूप से कॉम्प्यूटर चलाने के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम की आवश्यकता होती हैं, यूज़र को इंटरफ़ेस देना, हार्डवेयर को मैनेज करना, कॉम्प्यूटर में एप्लिकेशन रन करना, फ़ाइल स्टोरेज मैनेज करना आदि कामों में ऑपरेटिंग सिस्टम आवश्यक होती हैं।
ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्य:
ऑपेरेटिंग सिस्टम के कार्य मुख्यतः निम्नलिखित हैं।
यूजर इंटरफ़ेस:
ऑपेरेटिंग सिस्टम यूज़र को इंटरफ़ेस देती हैं याने की यूज़र को एप्लिकेशन या प्रोग्राम में जाना या उसे ओपन करना होता हैं तो ऑपेरेटिंग सिस्टम यूज़र को मदत करती है।
जैसे कि आप माइक्रोसॉफ्ट वर्ड ओपन करना हो तो आप start button पर क्लीक करने के बाद आपके सामने लिस्ट आएगी वहा से आप all program पर क्लीक करोगे तो ओर दूसरी लिस्ट आपके सामने आएगी। ऑपेरेटिंग सिस्टम के ज़रिए आप ऐसे ही एप्लिकेशन ओपन कर सकते हो।
ऑपेरेटिंग सिस्टम यूज़र को इंटरफ़ेस देती हैं याने की यूज़र को एप्लिकेशन या प्रोग्राम में जाना या उसे ओपन करना होता हैं तो ऑपेरेटिंग सिस्टम यूज़र को मदत करती है।
जैसे कि आप माइक्रोसॉफ्ट वर्ड ओपन करना हो तो आप start button पर क्लीक करने के बाद आपके सामने लिस्ट आएगी वहा से आप all program पर क्लीक करोगे तो ओर दूसरी लिस्ट आपके सामने आएगी। ऑपेरेटिंग सिस्टम के ज़रिए आप ऐसे ही एप्लिकेशन ओपन कर सकते हो।
ऑपेरेटिंग सिस्टम में आयकॉन होते हैं इसके जरिये आप एप्लिकेशन यूज़ कर सकते हो। आजकल तो स्पीच रिकॉगनिशन के जरिए आपको इंटरफ़ेस मिलता हैं यानि कि आप वॉइस कमांड दे सकते हो।
रनिंग ऍप्लिकेशन:
ऑपेरेटिंग सिस्टम के द्वारा आप एप्लिकेशन रन कर सकते हो, आप एक ही बार कहि सारे ऍप्लिकेशन चला सकते हों।
अगर आप माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में काम कर रहे हो और आपको माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल में भी कम करना है तो आप माइक्रोसॉफ्ट वर्ड बंद किए बिना उसे बैकग्राउंड में रखकर टास्कबार मे रखकर आप एक्सेल स्टार्ट कर सकते हो।
रिसोर्सेज मैनेजमेंट :
कॉम्प्यूटर के इनपुट आऊटपुट डिवाइस इन सभी में संसाधन यानी मैनेजमेंट रखना ऑपरेटिंग सिस्टम का काम होता हैं।
जैसे कि कॉम्प्यूटर मेमोरी, प्रिंटर, कीबोर्ड, माउस, मॉनिटर इन सभी डिवाइस में एक प्रकार का समतोल रखना और इन सभी के साथ काम करना होता हैं। और ये सभी अपना काम कर रहे कि नहीं ये भी देखना होता हैं।
ऑपेरेटिंग सिस्टम की विशेषताएं
कॉम्प्यूटर को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है ऑपेरेटिंग सिस्टम इस ऑपेरेटिंग सिस्टम की क्या विशेषताएं है ये हम जानेंगे।
बूटिंग: कॉम्प्यूटर बूटिंग दो प्रकार की होती हैं - 1.कोल्ड बूट: कॉम्प्यूटर बंद हैं और उसे चालु करे तो इसे कहते है कोल्ड बूट। कोल्ड यानि ठण्ड कॉम्प्यूटर बंद हो तो कोल्ड होगा। 2.वॉर्म बूट: वॉर्म यानी की गरम अगर कॉम्प्यूटर चालु है उसे फिरसे बंद न करके पॉवर बंद न करके रीस्टार्ट करें उसे कहते है वॉर्म बूट
आयकॉन: कॉम्प्यूटर में आयकॉन महत्वपूर्ण होते है ये हमें ग्राफ़िकल इंटरफ़ेस पुराते हैं इसका इस्तेमाल करके किसी एप्लिकेशन या प्रोग्राम में हम सहजता से जा सकते हैं।
विंडो: ऑपेरेटिंग सिस्टम हर एक एप्लिकेशन के लिए विंडो होती है ताकि चालु एप्लिकेशन देखा जा सके।
हेल्प: इसकी मदद से आप ऑनलाइन हेल्प ले सकते हो।
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ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार
ऑपरेटिंग सिस्टम के बहुत सारे प्रकार देखने को मिलते हैं, लेकिन मुख्य रूप से ऑपरेटिंग सिस्टम के 3 प्रकार होते है।
1. एम्बेडेड ऑपरेटिंग सिस्टम:
एम्बेडेड ऑपरेटिंग सिस्टम को रिअल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम भी कहा जाता है। इस ऑपरेटिंग सिस्टम को एक ही डिवाइस में जतन किया जाता है। जैसे कि मोबाइल वॉचेस, विडिओ गेम डिवाइस, स्मार्टफोन इन में एक ही डिवाइस में ऑपरेटिंग सिस्टम को बूट किया जाता है। रिअल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम में टाइम महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसके दो प्रकार होते हैं
A) हार्ड रिअल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम
इसमें टाइम महत्वपूर्ण होता हैं इस ऑपरेटिंग सिस्टम में दिया गया हुआ कार्य उसी टाइम में पूरा करना होता हैं वो कार्य पूरा करने की गारंटी दी जाती है और उसे टाइम के अंदर ख़त्म भी किया जाता हैं।
B) सॉफ्ट रिअल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम
इस ऑपरेटिंग सिस्टम में भी टाइम महत्वपूर्ण होता हैं लेक़िन सख़्त नहीं होता इसमें दिया गया हुआ कार्य पूरा करने की कोशिश की जाती हैं लेकिन पूरा करने की गारंटी नहीं होतीं। इसमें कार्य पूरा करते वक़्त उस कार्य की प्रायोरिटी को देखकर उस कार्य को पहले पूरा किया जाता हैं।
2.स्टैंड अलोन ऑपरेटिंग सिस्टम:
स्टैंड अलोन ऑपरेटिंग सिस्टम को डेस्कटॉप ऑपरेटिंग सिस्टम भी कहा जाता हैं। इस ऑपरेटिंग सिस्टम को डेस्कटॉप या लैपटॉप में जतन किया जाता है। ये ऑपरेटिंग सिस्टम हार्ड डिस्क में लोड की जाती है, कभी कभी लैपटॉप और डेस्कटॉप नेटवर्क का हिस्सा होते है।
3.नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम:
नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम में एक से ज्यादा कॉम्प्यूटर नेटवर्क द्वारा जोड़े जाते है। इसमें एक संस्था, महाविद्यालय या किसी ऑफिस के नेटवर्क के कॉम्प्यूटर जोड़े जाते है।
नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम में एक कॉम्प्यूटर की हार्ड डिस्क में पूरा डेटा रहता है इस कॉम्प्यूटर को सर्वर कहा जाता हैं। इस सर्वर से नेटवर्किंग के ज़रिए बाकी नेटवर्क के कॉम्प्यूटर में शेयर किया जाता है।
4. बैच ऑपरेटिंग सिस्टम
यह ऑपरेटिंग सिस्टम सीधे सीधे यूज़र को कनेक्ट नहीं करती,इस सिस्टम में एक समान jobs को एक batch में जोड़ा जाता हैं और उसे punch कार्ड में स्टोअर किया जाता है।
फिर उस punch कार्ड को ऑपरेटर के पास दिया जाता हैं ऑपरेटर उस punch कार्ड को प्रोसेसिंग के लिए कॉम्प्यूटर के पास भेज देता हैं । कॉम्प्यूटर उस punch कार्ड से क्रमबद्ध तरीके से हर एक जॉब पूरा करता हैं।
इसमें परेशानी बहूत होतीं हैं batch बनाने के लिए एक समान jobs की आवश्यकता होती हैं और जॉब बनाने में टाइम लगता है।
और भी प्रोसेस करते वक्त किसी भी jobs में कुछ गलतियां हुईं तो सभी batch ही कि प्रोसेस रुक जाती है और फिर उस ग़लती को सुधारने में वक्त भी लगता हैं उस ग़लती को सुधारने के बाद ही आप batch की प्रोसेस पूरी कर सकते हो।
5. सिंगल यूज़र मल्टी यूज़र ऑपरेटिंग सिस्टम
सिंगल यूज़र ऑपरेटिंग सिस्टम में एक समय में एक सिस्टम पर केवल एक ही यूज़र काम कर सकता हैं या उसे यूज़ कर सकता हैं।
मल्टी यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम में एक समय एक ही सिस्टम पर एक साथ एक से ज्यादा यूजर काम कर सकते हैं या उसे यूज़ कर सकते हैं।
6. सिंगल टास्किंग मल्टी टास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम
सिंगल टास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम में एक समय एक ही सिस्टम में एक यूज़र सिर्फ एक ही काम कर सकता हैं। इसका उदाहरण हैं palm os
मल्टी टास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम में एक समय में एक ही सिस्टम में एक यूज़र एक से ज्यादा काम कर सकता हैं। इसका उदाहरण है Microsoft Windows, Mac Os.
मेरा ये आर्टिकल ऑपरेटिंग सिस्टम क्या हैं आपको कैसे लगा ये जरूर अपने कमेन्ट में लिखकर बताइए। और अगर आपके पास इसके लिए कुछ सुझाव हो तो जरूर बताइए जिसे मेरी ग़लती समझ आए आपके सभी सुझाव का स्वागत है। आप इसे जरूर पढ़ते रहे ओर अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें।
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