Wednesday, April 3

भारत का पहला सुपर संगणक परम-8000

     दोस्तों, एक बार फिर से स्वागत हैं आप सभी का हमारे आर्टिकल ब्लॉग संगणक ज्ञान में। आज हम भारत का पहला संगणक परम्8000 के बारे में जानकारी पढ़ लेते हैं तो शुरू करते हैं सबसे पहले दुनिया में सुपर संगणक की शुरूआत कब हुई

सुपर संगणक का इतिहास

    दुनिया का पहला सुपर संगणक इल्लीआक 4 है,जो की 1975 में काम करना आरंभ किया। इस सुपरकम्प्युटर को डेनियल स्लोटनिक ने विकसित किया था। यह सुपरकम्प्युटर इतना पावरफुल था की यह अकेले ही एक बार में 64 कंप्यूटरों का काम कर सकता था। इसकी कार्य क्षमता 30 करोड़ परिकलन क्रियाएं प्रति सेकंड थी, सीधे शद्बों में कहे तो जितने देर हमें 8 तक की गिनती गिनने में लगते उतने समय में यह जोड़, घटाना, गुणा, भाग के 30 करोड़ सवाल हल कर सकता था।


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विश्व के सर्वश्रेष्ट 5 महासंगणक

तिअन्हे-१अ (एन यू डी टी), चीन

सिलिकॉन ग्राफिक्स (एसजीआई), न्यू मैक्सिको

एका, सीआरएल (आर्म ऑफ टाटा सन्स),भारत

ब्लू जीन/ एल सिस्टम (आईबीएम), यूएस

ब्लू जीन/पी सिस्टम (आईबीएम), जर्नी   

    इंटरनेशनल कांफ्रेंस फॉर हाई परफोर्मेंस कंप्यूटिंग रेनो (कैलिफोर्निया) ने दुनिया के टॉप- 500 कंप्यूटरों की सूची जारी की है। इसमें टाटा के सुपर संगणक को दुनिया में चौथा और एशिया में सबसे तेज सुपर कंप्यूटर करार दिया गया है। यह एक सेकंड में 117.9 ट्रिलियन (लाख करोड़) गणनाएं कर सकता है। 40 वर्ष पहले सुपर कंप्यूटर के बाजार में जहां महज कई कंपनियां थी, वहीं अब इस बाजार में क्रे, डेल, एचपी, आईबीएम, एनईसी, एसजीआई, एचपी, सन जैसे बड़े नाम ही बचे हैं।

 भारत की सुपर संगणक की कहानी

 भारत के सुपर संगणक की कहानी बड़ी रोचक हैं, शुरुआती दौर अमेरिका और जर्मनी ये दोनों देश ही सुपर संगणक बनाते थे। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी ने अमेरिका के पास सुपर संगणक नहीं तो तकनीक की मांग की अमेरिका ने इसे साफ नकार दिया। इसका कारण यह था कि अमेरिका नहीं चाहतीं की भारत सुपर संगणक के मामले में अमेरिका से बराबरी करें, और भारत परमाणु ऊर्जा में भी संशोधन ना कर पाएं।इसके बावजूद भी भारत ने हार नहीं मानी और पूर्णतः अपने देश की तकनीक से विकसित सुपर संगणक बनाने की योजना बनायीं। यह संगणक परमाणु डेवलपमेंट में योगदान दे सकता था। 
       1998 में डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स और इसके संचालक डॉ. विजय भाटकर के अगुवाई में सेंटर फ़ॉर डेवेलपमेंटऑफ एडवांस कम्प्यूटिंग (C-DAC) की स्थापना पुणे में की। इसके लिए सीडैक को शुरूआत केे 3 साल का समय दिया गया। और 30 करोड़ का बजट का फड़ मंजूर किया, यह बजट और समय अमेरिका के एक सुपर संगणक खरिदने के बराबर था। इस लागत सेे काम शुरू हुआ औऱ हमारेे सायंटिस्ट ने अपनी अपार मेहनत सेसाकार किया पूर्णतः स्वदेस तकनीकी का परम् 8000।इसका नाम संस्कृत भाषा में से रखा गया संस्कृत में परम् का मतलब है सर्वोच्च

Save Now and Scale with Cloudways परम्-8000 की विशेषताए

     परम्8000 को सन 1991 में रिलीज़ किया गया इसमें इनमोस 800 ट्रांस्प्यूटर का इस्तेमाल किया गया। ट्रांस्प्यूटर कमें मायक्रो प्रोसेसर एक दूसरे को जोड़ने के लिए एक अभिनव मायक्रो प्रोसेसर को डिज़ाइन किया गया था। यह एक परिवर्ती विन्यास के साथ इंटरकनेक्शन के साथ वितरीत स्मृती आईएमआईडी वाला आर्किटेक्चर था। इसमे ब्रिटेन,जर्मनी, रूस को निर्यात किये गये 64 सीपीयू थे।
     परम -8000 सुपर संगणक के बाद परम् सुपर संगणक की सीरीज बनाई गई। वो निम्नलिखित है।
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परम्-8600

    परम्-8600 यह सुपर संगणक परम्-8000 संगणक का सुधारीत रूप था। इस सुपर संगणक में 256 सीपीयू लगाए गए थे। हर चार inmos T800 के लिए I-860 को-प्रोसेसर लगा गया था।इसका निर्यात भी कहीं देशों में किया गया।

परम्-9900

   परम्-9900 में super spark2 प्रोसेसर का इस्तेमाल किया गया था। इस सुपर संगणक एक एमपीपी होने के लिए डिज़ाइन किया गया था, डिज़ाइन को मोड्यूलर बनाने के लिए बदला गया ताकि नए प्रोसेसर आसानी से शामिल किया जा सके। साधारणतः इसमे 32- 40 प्रोसेसर का इस्तेमाल किया जाता था लेकिन clos नेटवर्क टोपोलॉजी का इस्तेमाल करके इसमें 200 प्रोसेसर लगाए जा सकते थे।

परम्-10000

   परम् 10000 सन 1998 में रिलीज़ किया गया यह संगणक 10000 कई स्वतंत्र नोड्स प्रणाली पर आधारित था। प्रत्येक सन एंटरप्राइज़ 250 सर्वर पर आधारित थे और प्रत्येक सर्वर में दो 400 MHz UltraSPARC 2 प्रोसेसर लगे थे। बेस कॉन्फ़िगरेशन में तीन कंप्यूट नोड्स और एक सर्वर नोड था। इस आधार प्रणाली की अधिकतम गति 6.4 GFLOPS थी।एक टिपिकल प्रणाली में 160 सीपीयू शामिल होते और 100 GFLOPS तक सक्षम हो सकती थी लेकिन, यह आसानी से TFLOP श्रृंखला के लिए स्केलेबल था। रूस और सिंगापुर देशों में इसका निर्यात किया गया।

परम् पद्म

   एप्रिल 2003 में इसे रिलीज़ किया गया। यह 1024 GFLOPS (गिगफ्लोप्स) यानी कि लगभग 1 TFLOPS की गति से काम करता है। इसमें 1 गीगाहर्टज (GHz) के 248 आईबीएम power4 सीपीयू का इस्तेमाल किया गया था। यह भारत का पहला सुपर संगणक था जिसने 1TFLOPS की गति को पार किया था।

परम् युवा

  परम् युवा सुपर संगणक नवम्बर 2008 को रिलीज़ किया गया था। इसकी अधिकतम स्पीड़ 38.1TFLOPS है और न्यूनतम स्पीड़ 54 TFLOPS है। इसमें 46078 कोर है, जो 2.9 गीगाहर्टज (GHz) इन्टेल के 73XX पर आधारित है।

परम् युवा द्वितीय

   यह भारत का पहला सुपर संगणक है, जो 500 TFLOP से अधिक स्पीड से काम करता था। इसकी स्पीड़ 524 TFLOPS की थीं। परम् युवा द्वितीय 8फरवरी 2012 को रिलीज़ किया गया। 16 करोड लागत से इसका निर्माण कार्य सिर्फ़ 3 महीने की अवधी में पुणे के C-DAC (सी-डैक) द्वारा विकसित किया गया। नवम्बर 2012 में विश्व के 500 सुपर संगणक की सुची में उसकी रैकिंग 35 वे स्थान पर था। Save Now and Scale with Cloudways
    परम युवा द्वितीय को जैव सूचना विज्ञान, मौसम पूर्वानुमान, भूकंप डेटा विश्लेषण, एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग, वैज्ञानिक डाटा प्रोसेसिंग और दवा के विकास के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी जैसे शैक्षिक संस्थानों को राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क के माध्यम से कंप्यूटर से जोड़ा जा सकता है।
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परम् शिवाय

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में परम शिवाय सुपर कंप्यूटर को लांच किया, इसे IIT-BHU (बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय) में लांच किया गया है। इस कंप्यूटर की 40% क्षमता का उपयोग नवोदय विद्यालय के छात्रों द्वारा किया जायेगा।
भारत का पहला सुपरकंप्यूटर परम 8000 था, उसे 1991 में लांच किया गया था। वर्तमान में भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान में “प्रत्युष”, राष्ट्रीय मध्यम श्रेणी मौसम पूर्वानुमान केंद्र के पास “मिहिर” तथा IISc के पास SERC-Cray नामक सुपर कंप्यूटर हैं।

रोचक तथ्य

  • इसका निर्माण राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन के तहत 32.5 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है।
  • इस सुपर कंप्यूटर की क्षमता 833 टेराफ्लॉप है।
  • परम शिवाय में 1 पेटा बाइट सेकेंडरी स्टोरेज, 233 प्रोसेसर नोड, 384 GB पर नोड DDR4 RAM, पैरेलल फाइल सिस्टम इत्यादि हैं।
  • इस सुपर कंप्यूटर का उपयोग सिंचाई योजनाओं, ट्रैफिक प्रबंधन, स्वास्थ्य इत्यादि क्षेत्रों में किया जायेगा।
  • इस सुपर कंप्यूटर का निर्माण फ़्रांसिसी कंपनी Atos ने किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय के अंतर्गत सी-डैक तथा Atos ने सुपरकंप्यूटर के निर्माण के लिए तीन वर्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किये गये हैं।
  • इस सुपर कंप्यूटर का निर्माण राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत किया गया है। इस मिशन के तहत देश के विभिन्न अनुसन्धान व शैक्षणिक संस्थानों में 70 से अधिक सुपरकंप्यूटर का नेटवर्क तैयार किया जायेगा। इस मिशन  के तहत सात वर्षों के लिए 4500  करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।
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   दोस्तों यह थे भारत के सुपर संगणक परम्-8000 इसके साथ साथ उनकी नई सीरीज के सुपर संगणक अब अपनी अगली पोस्ट में विश्व के सुपर संगणक और भारत सुपर संगणक के बारे में जानकारी।

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